Thursday, November 29, 2018

अपने आंगन की गौरैया की ये बातें आप नहीं जानते

घरेलू गौरैया दुनिया में सबसे ज़्यादा इलाक़ों में पायी जाने वाली जंगली चिड़िया है. ये परिंदा अंटार्कटिका के सिवा हर महाद्वीप पर पाया जाता है.

गौरैया को अक्सर इंसानों की बस्ती के आस-पास देखा गया है. फिर चाहे वो शहरी इलाक़ा हो, जंगल हों या फिर ग्रामीण बस्तियां.

हालांकि, अब पूरी दुनिया में गौरैया की आबादी घट रही है. ब्रिटेन में तो गौरैया बड़ी तेज़ी से ख़त्म हो रही हैं.

लेकिन, बहुत से देशों में गौरैया की अपनी अलग पहचान है. किसी झाड़ी, पेड़ या दीवार की दरार से चांव-चांव करती गौरैया का दिख जाना बहुत आम बात है.

कभी ये तालाब में तो कभी किसी नदी या पोखर में गोते लगाती भी दिख जाती हैं.

कैसे हुआ गौरैये का विकास

इतनी ज़्यादा तादाद में होने के बावजूद, अचरज की बात ये है कि इसके विकास की कहानी के बारे में हाल के दिनों तक लोगों को ज़्यादा जानकारी नहीं थी.

माना जाता है कि इस पक्षी की नस्ल सबसे पहले मध्य-पूर्व में विकसित हुई थी. यहीं से ये पूरे यूरोप और एशिया में फैल गई.

बाद में इस पंछी को ऑस्ट्रेलिया और उत्तरी अमरीका ले जाकर आबाद किया गया.

यूजीन शीफेलिन नाम के एक कलाकार ने अमरीका में शेक्सपियर के नाटकों के मंचन के दौरान गौरैया को भी नाटकों का किरदार बनाने की कोशिश की.

ये बात उन्नीसवीं सदी के आख़िर की है. शायद यूजीन ने ही अमरीका का तार्रुफ़ गौरैया से कराया था.

क्या गौरैया को ग़ैरज़रूरी समझा गया?

नॉर्वे की ओस्लो यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक मार्क रविनेट को घरेलू गौरैया के विकास की कहानी में दिलचस्पी तब पैदा हुई, जब उन्हें अंदाज़ा हुआ कि गौरैया के विकास की कहानी पर तो किसी ने ढंग से ग़ौर ही नहीं किया.

द रॉयल सोसाइटी की तरफ़ से प्रकाशित एक लेख में मार्क ने इस परिंदे के विकास पर अच्छी रोशनी डाली है.

गौरैया चूंकि बड़ी तादाद में हमारे आस-पास दिखती है, शायद इसीलिए हमने इसके विकास को समझने की कोशिश नहीं की.

लेकिन, मार्क रविनेट के रिसर्च से कई चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं.

ये बात तो पहले से साफ़ थी कि गौरैया ने ख़ुद को इंसानों के आस-पास रहने के हिसाब से ढाल लिया था.

चूंकि, गौरैया ने इंसानी बस्तियो के आसपास लंबा वक़्त गुज़ारा था, तो ये वक़्त की मांग थी कि ये पंछी, इंसानों से तालमेल बैठा लें.

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